Wednesday, June 11, 2014

Creating new pastures from waste land reclamation by Cows

Wasteland Reclamation for new Pastures & role of Cows
( Rigvidhan अगव्यूतिक्षेत्रमागन्म)
Rig Ved 6.47 mantras 20 to 24
Waste Land reclamation has been a very important subject receiving attention of planners. Given here is the Vedic insight in to waste land reclamation.

20.अगव्यूति क्षेत्रमागन्म देवा उर्वी सती भूमिरंहूरणाभूत् ।
बृहस्पते प्र चिकित्सा गविष्टावित्था सते जरित्र इन्द्र पन्थाम् ।। RV6.47.20
अगव्यूति   Waste land that is not visited by cows. (Forest land that is about 3 KM deep (one can hear and call his cows grazing in about 3 KM range) where cows could roam about without fear of predators were called अभयारण्य.We have come upon a vast tract of land that has no cows. It has the looks of having been devastated by wars. Bring on the cows and provide special care for this land to restore its health, and show the path for good citizens to bring it to life.

23.दिवेदिवे सदृशीरन्यमर्धं कृष्णा असेधदप सद्मनो जा: ।
अहन् दासा वृषभो वस्नयन्तोदव्रजे वर्चिना शम्बरं च ।। RV 6.47.21
Day by day, in stages by help of black skinned cows? Create habitat and facilities of water and suitable housing for manpower and other land reclamation resources, in one part of land and then moving over to the next part of land, it is possible to reclaim the wasteland, and replace them with greenery to attract rains and make the land habitable. (This mantra also contains the modern science about Pseudomonas Syringes bacteria that is harboured in greenery at ground levels and rises to cloud heights to induce precipitation of rains and thus protects green lands from becoming deserts.)
22. प्रस्तोक इन्नु राधसस्त इन्द्र दश कोशयीर्दश वाजिनोऽदात् ।
दिवोदासादतिथिग्वस्य राध: शाम्बरं वसु प्रत्यग्रभीष्म ।। 6.47.22
Thus it is possible to move forward in blocks of ten miles to gradually reclaim waste lands to convert them in to fertile agriculture wealth producing farm land by greening to attract atmospheric rains.
23.दशाश्वान् दश कोशान् दश वस्त्राधिभोजना ।
दशो हिरण्यपिण्डान् दिवोदासादसानिषम् ।। 6.47.23
Thus in blocks of ten miles land reclamation can provide prosperity and wealth by farm produce, for food; cotton etc for clothing, horses etc. for energy and modes of transport.

24.दश रथान् प्रष्टिमत: शतं गा अथर्वभ्य: ।
अश्वथ: पायवे ऽदात् ।। 6.47.24
Thus a peace loving (pastoral) life style emerges in society supported by  with tens of horse drawn carriages and hundreds of cows.


Thursday, May 29, 2014

Who is Hindu according to Vedas

हिंदु कौन है वेदों  के अनुसार –जिस के राष्ट्र में गौ की रक्षा होती है  
हिङ्कृण्वती वसुपत्नी वसुनां वत्समिच्छन्ती मनसा न्यागन्‌।
दुहाम्श्विभ्यां पयो अघ्न्येयं सा वर्धतां महते सौभगाय।। अथर्व 7.77.8
 श्रेष्ठ धनों  को पुष्ट  करने  वाली गौ हृदय से बछड़े   की कामना करती हुई हिं हिं  कर के रंभाती हुई नित्य  आवे । यह कभी  न मारने योग्य गोमाता अश्वियों*   के लिए भी दूध का दोहन कराए. वह (गोमाता) हमारे महान  सौभाग्य के लिए वृद्धि को प्राप्त हो.
·               अनाथ घोड़े  के बच्चों को  गाय के  दूध पर पाले जाने  की भारतीय  प्रथा  आज भी विश्व में प्रचलित है

·               इस वेद मंत्र में गोपालन और गोसम्वर्धन को  मानव  जाति की समृद्धि और सौभाग्य का मूल मंत्र बताते  हुए हिन्दु जाति के नाम निर्देशपूर्वक उस की विशेषताओं का भी वर्णन किया गया है. मूल मंत्र के दोनों पादों के प्रथम अक्षरों से प्रत्याहार प्रणाली से हिन्दु शब्द की निष्पत्ति हुई है. ऋचा संकेतदेती है कि हिन्दु वह है जिस के  आंगन में हिं हिं करती हुई सवत्सा गाय  यज्ञादिदेवकार्य के लिए दुहीजाती है और जिस के (हिन्दु के) शासन में जिस के देश तथा राज्य में गौ अघन्या बन कर निरंतर फूलती फलती है. जहां गो रक्षण होता है वह राष्ट्र सर्वदा सौभाग्य और समृद्धि को  पाता है. 

Thursday, April 10, 2014

Cows make Bharat desh

वेदों के अनुसार भारत  देश.
राजा द्वारा भारत देश निर्माण
गौ ,शिक्षा और राजा के आचरण, इन तीन का राष्ट्र निर्माण मे महत्व
Making of Bharat Desh  RV5.27

 ऋषि:- त्रैवृष्ण्याष्ययरुण:,पौरुकुत्सस्त्रसदस्यु:, भारतोश्वमेधश्च राजान:
अग्नि:, 6 इन्द्राग्नी। त्रिष्टुप्, 4-6 अनुष्टुप्।
ऋषि: = 1. त्रैवृष्णा:= जिस के उपदेश तीनों  मन शरीर व आत्मा के सुखों को शक्तिशाली बनाते  हैं  
            2. त्र्यरुण:= वह तीन जो  मन शरीर व आत्मा के सुखों को प्राप्त कराते हैं
            3.पौरुकुत्स त्रसदस्य: = जो राजा सज्जनों का पालक व तीन (दुराचारी,भ्रष्ट , समाज द्रोही)
              दस्युओं को दूर करने वाला
            4. राजान भारतो अश्वमेध: ;  
                भारतो  राजान:  - राजा जो स्वयं की यज्ञमय आदर्श जीवनशैलि  से प्रजा को भी यज्ञीय
                मनोवृत्ति वाला बना कर राष्ट्र का उत्तम भरण करता है .
               अश्वमेध: - अश्व- ऊर्जा  और मेधा- यथा योग्य मनन युक्त आत्म ज्ञान को धारण करने वाली
               परम बुद्धि   
  

            इन्द्राग्नी = इन्द्राग्नि: = उत्साह और ऊर्जा से  पूर्ण सदैव अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे विजयी व्यक्ति  Have fire in their belly to be ultimate Doers


COWS’ role in Vision for Bharat varsh  Nation

1.    अनस्वन्ता सत्पतिर्मामहे मे गावा चेतिष्ठो असुरो मघोन:
त्रैवृष्णो अग्ने दशभि: सहस्रैर्वैश्वानर ष्ययरुणश्चिकेत ।।RV5.27.1
(गावा चेतिष्ठ:) गौओं से  प्राप्त उत्तम चेतना द्वारा (सत्पति: ) सज्जनों के पालन के लिए भूत  काल की उपलब्धियों के अनुभव के आधार पर  वर्तमान और भविष्य के लिए (तीनों काल )(त्रैवृष्ण:)में शरीर, मन, बुद्धि  तीनों को  शक्तिशाली बनाने वाली (असुरो मघोन:) ऐश्वर्यशाली प्राण ( जीवन शैलि ) को  (त्र्यरुण:) शरीर , मन और बुद्धि  के लिए ज्ञान ,कर्म और उपासना द्वारा  (दशभि: सहस्रैर्वैश्वानर) समस्त प्रजा की प्रवृत्तियों की  धर्म अर्थ और काम की उन्नति के लिए (अनस्वन्ता) उत्तम वाहनों से युक्त समाज, (मामहे) उपलब्ध कराओ.
Excellent cows should be ensured to build physically healthy, peaceful and high intellectual society. Current and Future planning should be based on experience of past working results, to obtain excellent Health, Mentality and Intellect in the nation to provide for a prosperous life style. Such a nation is self motivated in following the path of righteous behavior, charitable disposition and God loving conduct in their daily life.
Among other things excellent infrastructure of communication, transport should be provided.
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Hundreds of well fed cows
2.        2.यो मे शता विंशतिं गोनां हरी युक्ता सुधुरा ददाति
वैश्वानर सुष्टुतो वावृधानोऽग्ने यच्छ त्र्युरुणाय शर्म ।। RV 5.27.2
3.        (वैश्वानर) धर्म अर्थ और काम को प्राप्त कराने वाली ऊर्जा और (वावृधान: अग्नि:) निरन्तर प्रगति देने वाले यज्ञ (त्र्यरुणाय) शरीर, मन और बुद्धि  के लिए सेंकड़ों गौओं और  बीसियों  उत्तम शकटों से (हरी:) जितेंद्रिय पुरुषों से –भौतिक साधनों और श्रेष्ठ समाज से  युक्त हो कर  (शर्म यच्छ) विश्व का कल्याण  प्राप्त करो
4.        Urge for continuous strong positive motivation based activities in individuals creates a prosperous, peace loving, healthy, self disciplined sustainable society with hundreds of cows and dozens of carts loaded with green fodder for cows for aorganic food, and good infrastructure base. Nation provided with such infrastructure has a society that is rich in physical resources, and  has well behaved people for welfare of the world.     

Planning in Nation
  
    3. एवा ते अग्ने सुमतिं चकानो नविष्ठाय नवमं त्रसदस्यु:
     यो मे गिरस्तुविजातस्य पूर्वीर्युक्तेनाभि ष्ययरुणो गृणाति ।।RV 5.27.3
तेजस्वी विद्वान प्रकृति के विधान और अनुभव से प्राप्त ज्ञान के उपदेशों की कामना करता हुआ सब वासनाओं से मुक्त समाज के निर्माण द्वारा भविष्य के लिए उत्तम नवीन समाज की  आवश्यकताओं की पूर्ती और  तीनो प्रकार तम , मन और आत्मा से सुखी समाज का निर्माण करता है और सब से ऐसी विचार धारा का सम्मान करने को कहता है.
Bright enlightened intellectual leadership seeks guidance from Nature the environment friendly and traditional empirical wisdom to build a hedonism free culture for the growing needs and aspirations of future generations. By honoring and propagating such wisdom only an ideal and happy society is evolved.
Education in Nation

  4. यो इति प्रवोचत्यश्वमेधाय सूरये
दददृचा सनिं यते ददन्मेधामृतायते ।।RV 5.27.4
(राजा का दायित्व है कि ) जो विद्वद्जन (राष्ट्र की उन्नति के लिए) समाज में ऊर्जा (भौतिक और आत्मबल ) के विस्तार और सत्य असत्य के निर्णय करने मे समाज को सक्षम  करने के वेद विद्यानुसार उपदेश करते  हैं,उन को सम्माननीय पद दे  और उन का सत्कार करे.
For growth of the nation it is responsibility of King recognize, honor and promote intelligent teachers that develop the society by educating it in growth conservation of physical energies and their mental energies, with ability to discern truth from untruth.
Bulls make excellent Nation
4.        5. यस्य मा परुषा: शतमुध्दर्षयन्त्युक्षण:
अश्वमेधस्य दाना: सोमा इव त्र्याशिर: ।। RV5.27.5
5.        (यस्य मा शतम्‌ उक्षण: परुषा:) जो मेरे लिए , सेंकड़ो क्रोध  से  रहित सधे हुए वीर्य सेचन में समर्थ उत्तम वृषभ और  कठिन परिश्रम साध्य बैल, (त्रयाशिर:)   तीनों - बालक,  युवा, वृद्ध तीनों प्रजाजनों  के लिए - राष्ट्र में (अश्वमेध-ऊर्जा और मेधा)  -  तीनों  वसु (भौतिक सुख के साधन) रुद्र रोगादि से मुक्त,आदित्य सौर ऊर्जा के द्वारा, तीनों दूध,दही और अन्न  (सोमा: इव) श्रेष्ठ मानसिकता  तीन प्रकार से  शरीर को नीरोग,मन को निर्मल बुद्धि को तीव्र बनाते और (दाना:)इन दानों से  (उद्धर्ष्यन्ति ) उत्कृष्ट उल्लास का कारण बनते हैं .     
 Bulls that have excellent breeding soundness for providing excellent cows and oxen that are strong and mild mannered to provide power to the nation
Provide excellent health nutrition and intellect to all the three ie. infants youth and old persons with three bounties of happiness ie. Healthy environments, cheerfulness and solar energy by the three items of cows milk, curds and organic food to provide the three bounties of healthy disease free life, positive attitudes in life and sharp intellect to spread happiness all round.
 


6. इन्द्राग्नी शतदाव्न्यश्वमेधे सुवीर्यम्
क्षत्रं धारयतं बृहद् दिवि सूर्यमिवाजरम् ।।RV 5.27.6
उत्साह और ऊर्जा से  पूर्ण सदैव अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे विजयी,  योग्य मनन युक्त आत्मज्ञान  को धारण करने वाली परम बुद्धि से युक्त समाज,  असङ्ख्य पदार्थों से सूर्य के सदृश उत्तम पराक्रम तथा बलयुक्त  नाश से रहित महान राष्ट्र का निर्माण होता है.
Thus is created a Nation that is strong to protect itself from all destructive internal and external enemies, where the society consists of a prosperous, self motivated well behaved intelligent people.


  

Sunday, November 24, 2013

Bounties from Cows Rig Veda 1.4, AV 20.68

RV1.4, AV20.68  Bounties from a cow
गौपालन से उपलब्धियां
 मधुच्छन्दा वैश्वामित्र: इन्द्र:   गायत्री
Creates a civilized society
सभ्य समाज  बनता है

1.सुरूप कृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे जुहूमसि द्यविद्यवि ।।RV 1.4.1,AV20.68.1
Daily efforts in service of good milk giving cows bless us with beautiful bounties.
 प्रति दिन प्रचुर दुग्ध प्रदान करने वाली गौवों की सेवा  से सुन्दर समाज का विकास
 होता है।


Cows are knowledge enhancers   
गौ  बुद्धि बढ़ाती है
       2. उप नः सवनागहि सोमस्य सोमपाः पिब । गोदा इद्रेवतोमदः ।। RV 1.4.2, AV20.68.2
Cows give our vision to make knowledge creating hubs that increase our knowledge resource, makes us more enterprising to be more prosperous and happy.
           गौवों से दिव्य चक्षु मिलते हैं, गौ पालन से  पुरुषार्थी स्वभाव  बनता है, जो सुख और  संपन्नता लाता है
Facilitates Meditation
परमेश्वर का साक्षात्कार होता है
3. अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम् मा नो अति ख्य गहि ।।RV 1.4.3, AV20.68.3
Makes us hear the voice of our conscience in Meditation
ध्यानवस्था में हर विषय पर सुमति हमारे हृदय में अंतरमन में ही मिलती है. हम अपने अंतर्मन की सुमति का कभी तिरस्कार न करें.
Best Counsel
4.परेहि विग्रमस्तृतमिन्द्रं पृच्छा विपश्चितम् यस्ते सखिभ्य वरम् ।। RV1.4.4, AV20.68.4
May we learn to never ignore the voice of our conscience
हमारी अंतर आत्मा की आवाज़ ही सब से अधिक हितकारी सलाह सिद्ध  होती है.
Enables good articulation

5.उत ब्रुवन्तु नो निदो निरन्यतश्चिदारत दधानेन्द्र इद दुव: ।। RV1.4.5, AV20.68.5
Our speech becomes sweeter and civil
वाणी सदैव उत्तम भद्र बोलें कभी भी अभद्र निंदात्मक अपशब्द न बोलें
Peace loving temperament

6. उत नो सुभगाँ अरिर्वोचेयुर्दस्म कृष्टय: स्यामेदिन्द्रस्य शर्मणि ।।RV 1.4.6, AV20.68.6
A change is brought about in our temperament to earn our living by hard work and fair means. Our prosperity and conduct forces even our enemies to be envious.
हमारा उत्तम श्रमशील जीवन यापन द्वारा प्राप्त सौभग्य समृद्धि तथा भद्र व्यवहार हमारे शत्रुओं को भी हमारी प्रशंसा करने के लिए बाध्य करें.
Makes us Virile & Productive
7. एमाशुमाशवे भर यज्ञश्रियं नृमादनम् पतयन् मन्दयत्सखम् RV 1.4.7, AV20.68.7
Virility is established in our physical body and temperaments to bring forth good progeny and be good achievers in life.
वीर्य वृद्धि से पौरुष द्वारा उत्तम संतान और सोम वृद्धि से  जीवन मे उन्नति समृद्धि प्राप्त कराती है.
Removes obstacles to prosperity

अस्य पीत्वा शतक्रतो घनो वृत्राणामभव: प्रावो वाजेषु वाजिनम् ।। RV1.4.8, AV20.68.8
Our ability is strengthened to perform thousands of tasks to beat all obstacles in the path of our prosperity.
उत्पन्न सोम द्वारा विजय श्री प्राप्त करने के लिए हम शतक्रतु – सेंकड़ों शुभ कार्य करने वाले बनते हैं .
All round Prosperity


तं त्वा वाजेषु वाजिनं वाजयाम: शतक्रतो धनानामिन्द्र सातये ।।RV 1.4.9, AV20.68.9
 Cow develops the inventive temperament to accomplish innumerable techniques required for improving daily life.
(शतक्रतो) असंख्य वस्तुओं के विज्ञान को रखने वाले (धनानाम्‌) पूर्ण विद्या और सामर्थ्य को सिद्ध करने वाले पदार्थों का (सातये) अच्छे प्रकार सुख भोग करने के लिए (वाजेषु वाजिनम्‌) प्राप्त करने में समर्थ (त्वा वाजयाम:) नित्य प्रति जानने और प्राप्त करने के प्रयत्न करते हैं.
Cows provide Divine Blessings
प्रभु कृपा रहती है  

यो रायो3वनिर्महान्त् सुपार: सुन्वत: सखा तस्मा इन्द्राय गायत ।।RV 1.4.10, AV20.68.10..
Makes possible divine blessings by friendly role of the Almighty/
जो असंख्य धनधान्य से समृद्धि देने वाला परमेश्वर है वह एक सखा के रूप में ( गोसेवक के ) साथ रहता है, उसी का गुणगान सब करते हैं.