Friday, June 15, 2012

Collustrum for new born calf

अथर्व वेद 1/12 देवता यक्ष्मानाशन्‌  

Wasting diseases

जरायज: प्रथम उस्रिया वृषा वात्व्रजा स्तनयन्नेति वृष्टया !

नो मृडाति तनव ऋजगो रुजन् एकमोजस्त्रेधा विचक्रमे !! अथर्व 1/12/1

This Ved Mantra is very interestingly describing a very modern topic regarding the medicinal efficacy of colostrums of a new born cow. It is equally applicable as directive in Vedas about importance of breast feeding.

 Colostrums is the pre-milk fluid produced from the mother's mammary glands during the first 72 hours after birth. It provides life-supporting immune and growth factors that insure the health and vitality of the newborn.

Commercial Exploitation of Colostrums of Cows for Human beings is a big modern pharmaceutical  industry.

 Breastfeeding in humans as also for  new born calves provides  natural "seeding" -- the initial boost to  immune and digestive systems --.

Loss of youth & Vigor

In western medicine which gives no importance to ब्रह्मचर्य ,it is observed  that after puberty, the amount of immunity and growth factors present in human  bodies begin to decline. Human body becomes more vulnerable to disease, its energy level and enthusiasm lessens,  skin loses its elasticity, and there is  gain  of unwanted weight and  body looses muscle tone.  The modern humans also live in a toxic environment, with pollutants and allergens all around us. 

Research has shown that Colostrums have powerful natural immune and growth factors that bring the body to a state of homeostasis -- its powerful, vital natural state of health and well being. Colostrums help support healthy immune function; & also enable us to resist the harmful effects of pollutants, contaminants and allergens where they attack us.

Plus, the growth factors in Colostrums create many of the positive "side-effects" of a healthy organism -- an enhanced ability to metabolize or "burn" fat, greater ease in building lean muscle mass, and enhanced rejuvenation of skin and muscle.

It is a very common modern medicine practice to collect colostrums from freshly calved cows to produce medicinal products for boosting disease resistance, and  health promotion tonics  for  sick and elderly humans, specifically in debilitating diseases such as tuberculosis.  New born calves particularly males are immediately taken away for slaughter. Cow’s Colostrums are collected for making medicines for the Pharma industries. Calves in general are fed on an artificial feed called  Milk Replacer.

References to in the above ved mantra Atharv 1.12.1- जरायुजः, उस्रिया, वृषा, स्तन्यन्नेति, वृष्टया,  त्रेधा, are clear references to Colostrums  - first few days milk of a cow just after calving.  Literal meaning of these vedic words are – produce of a just calved cow which is in the process of releasing the placenta, milk giving cow,  shower of milk from the udder and three rumens of a cow having played the important role in giving rise to the extraordinary medicinal value of this early milk of a cow. In this Sookt this is being promoted for curing Tuberculosis, as

the very Dewata of this sookt- यक्षमानाशन्‌


अङ्गे अङ्गे शोचिषा शिश्रियाणं नमस्यन्तस्त्वा  हविषा विधेम !

अङ्कान्त्समङ्कान् हविषा विधेम यो अग्रभीत् पर्वास्या ग्रभीता !! अथर्व 1/12/2

हे सूर्य  आप की और   समीपवर्ती देवताओं  चंद्रमा, नक्षत्रादि तारादि की  दीप्ति  इस जगत और प्रत्येक प्राणी के अंग अंग में प्राण रूप से स्थित है. तुझ  को नमस्कार  करते हुवे हम हवि द्वारा तुम सब को  परिचर्या द्वारा तृप्त करते हैं.

मुञ्च शीर्षक्त्या उत कास एनं परुष्परुराविवेशा यो अस्य !

यो अभ्रजा वातजा यश्च शुष्मो वनस्पतीन्त्सचतां पर्वतांश्च !! अथर्व 1/12/3

हे सूर्य इस पुरुष को शिरोवेदना से मुक्त करो.वह खांसी जो इस के अंग अंग ( संधिस्थलों) में घुस कर बैठा है, उस से भी मुक्त कर,  जो शरीर को सुखा देने वाला पित्त विकार है उस से भी मुक्त कर, जो वर्षा काल मे श्लेष्रोग वात विकार से होता है उस से भी मुक्त कर. सब त्रिविध रोगों की निवृत्ति के लिए वन वृक्षों, वनस्पतियों  द्वारा यह सब रोग दूर हों.

शं मे परस्मै गत्राय शमस्त्ववराय मे!

शं मे चतुभ्यो अङ्गेभ्य: शमस्तु तन्वे3 मम !! अथर्व 1/12/4

मेरे ऊपर के शिरोभूत अङ्ग के लिए, मेरे नीचे के शरीर के लिए, मेरे हाथ पैर , तन सब अङ्गों के लिए सुख हो.

Modern Vet. Science only confirms what Vedas say about Cow care

 AV3.14 गावो गोष्ठो देवता  4.1.0 Management गो पालन विषय

AV Sukta12.4 अथर्व वेद 12-4 सूक्त -वशा गौ ,ऋषि- कश्यप: AV 12.4.1 अथर्व 12-4-1 On Donating a cow

गौ दान  किस को

ददामीत्येव ब्रूयादनु चैनामभुत्सत।

वशां  ब्रह्मभ्यो याचद्भ्यस्तत्प्रजावदपत्यवत्‌ || अथर्व 12.4.1

Cows should be given in keeping of learned persons

(veterinarians) who have noble temperaments.

गौओं को ब्राह्मण वृत्ति के पशु पालन  वैज्ञानिकों के ही दायित्व में देना  चाहिए । AV 12-4-2 Curse of a sick Cow दुःखी गौ का श्राप

प्रजया स वि क्रीणीते पशुभिश्चोप दस्यति।

य आर्षेयेभ्यो याचभ्दयो देवानां  गां न  दित्सति ।। अथर्व 12-4-2

Those who do not give cows in the keeping of such

 virtuous persons to bring about improvements in the

 cows, merely trade and do no service for society.

 They  suffer from curse of unhappy cows.

जो लोग कुशल कार्य कर्ताओं की सहायता से गौ संवर्द्धन  का कार्य

नहीं करते, वे केवल व्यापार वृत्ति से कार्य कराते हैं। वे दुखी  गौ के

श्राप के भोगी होते हैं। AV 12-4-3 Underfed Cow's Curse

दुःखी गौ का श्राप

कूटयास्य सं शीर्य-ते श्लोणया काटमर्दति।

बण्ड्या दह्य-ते गृहाः काणया दीयते स्वम् ।। अथर्व 12-4-3

Society that trades in unhealthy cows gets destroyed

By  curse of unhappy cows.

जो समाज गौ को व्यापार मान  कर चलाते हैं, वे दुखी गौ के श्राप से

नष्ट हो जाते हैं। AV12-4-4 same as above फिर वही

विलोहितो अधिष्ठानाच्छद्विक्लिदुर्नाम विन्दति गोपतिम् ।

तथा वशायाः संविद्यं दुरदभ्ना  ह्युच्यसे ।। अथर्व12-4-4

Miserly person's looking after the cows neglect their

Feed and health. Cows suffer bleeding and such

ailments which become incurable.

कंजूस गोपालक की गौ,रक्त  स्राव जैसे असाध्य रोगों से ग्रसित हो

कर नष्ट  हो जाती हैं। AV 12-4-5 Foot and mouth disease

मुंह खुरपका

पदोरस्या अधिष्ठानाद्विक्लिन्दुर्नाम विंदति|

अनामनात्सं शीर्यन्ते या मुखेनोपजिघ्रति ।। अथर्व 12-4-5

By sniffing her feet/ place where cow puts her feet, A

disease 'Wiklindu' is contracted that finally destroys

the cow. ( The obvious reference is to the contagious

Foot and mouth disease)

गौ अपने  खुर सूंघने  से मुंह खुर पका रोग से ग्रस्त हो कर नष्ट हो

जाती  है। AV12-4-6 Do not make Cut marks on Cow


गौ की पहचान के लिए कान मत काटो

यो अस्याः कर्णावास्कुनोत्या स देवेषु वृश्चते ।

लक्ष्मं कुर्व इति मन्यते कनीयः कृणुते स्वम् ।। अथर्व 12-4-6

Those persons who make cut marks on cow's ears for

Identification, are as if cutting short their own wealth.

गौ की पहचान के लिए  के कान नहीं काटने  चाहिएं। AV 12-4-7 Do not cut COW Hair गौ के बाल नही

काटे  जाते

यदस्याः कस्मै चिद्भोगाय बालान्कश्चित्प्रकृन्तति ।

ततः किशोरा म्रियन्ते वत्सांश्च धातुको वृकः ।। अथर्व 12-4-7

Those who cut hair of a cow for any reasons, are

Cursed  to suffer in life.

जो किसी तांन्त्रिक कार्य के लिए गौ के बाल लेते हैं उन को श्राप

 लगता है। AV 12-4-8 Protect Cows from attack by birds गौ को कौए इत्यादि पक्षियों से बचाएं

यदस्या गोपतौ सत्या लोम ध्वाङ्क्षो अजीहिडत् ।

ततः कुमारः म्रियन्ते  यक्ष्मो विन्दत्यनामनात् ।। अथर्व 12-4-8

If crows are allowed to attack a cow, the lazy care

taker of  cows will suffer from tuberculosis.

 ( Lazy persons attract Tuberculosis) 

जो चरवाहा गौ को कौए जैसे पक्षियों से नहीं बचाता , उस आलसी

को  क्षय रोग होगा । (आलस्य के कारण क्षय रोग होता है) AV12-4-9 Cow Dung and Urine

गोबर गोमूत्र

यदस्याः पल्पूलनं  शकृद्दासी समस्यति ।

ततोऽपरूपं जायते तस्मादव्येष्यदेनसः ।। अथर्व 12-4-9

Throwing away in to waste the Cow Dung and Cow

Urine disfigures the society.

गोबर गोमूत्र व्यर्थ करने  से समाज के रूप की सुन्दरता नष्ट हो जाती

है ।


पशु चिकित्सा सेवाएं AV 12-4-10 Cow Protection गौ सुरक्षा

जायमानाभि जायते  देवान्त्सब्राह्मणान्वशा ।

तस्माद ब्रह्मभ्यो देयैषा तदाहुः स्वस्य गोपनम् ।। अथर्व 12-4-10

Cow should always be under the care of

 Knowledgeable persons having altruistic attitudes.

This  is the best form of COW PROTECTION

गौपालन  में ब्राह्मण वृत्ति के कुशल गोपालकों से ही गौ सुरक्षित

रहती है। AV12-4-11 No Cow protection is cruelty

गौ की असुरक्षा अपराध है

य एनां  वनिमायन्ति तेषां देवकृता वशा।

ब्रह्मज्येयं तदब्रुवन्य एना निप्रयायते ।। अथर्व 12-4-11

Not providing cow in to proper hands for care is

cruelty to cows.

गौ को ब्राह्मण वृत्ति के लोगों के हाथ न देना गौ पर  अत्याचार है। AV 12-4-12 Same again वही विषय

य आर्षेयेभ्यो या चद्भयो देवानां गां न  दित्सति ।

आ स देवेषु वृश्चते ब्राह्मणानां  च मन्यते ।। अथर्व 12-4-12

Not providing the cows with such care, destroys good

 traditions of society.

गौवों को ऐसी सुरक्षा न  देने  से सामाजिक परम्पराओं का  नाश

होता है। AV 12-4-13 pre parturition post parturition


दूध से हटी गर्भिनी गौ सेवा विषय

यो अस्य स्याद् वशाभोगो अन्यामिच्छेत तर्हि सः ।

हिंस्ते अदत्ता पुरुषं याचितां च न  दित्सति ।। अथर्व 12-4-13

Productive cows can be kept for the immediate

 benefits but unproductive cows must be given for

 care by selfless persons.

बाखड़ी, गर्भिणी, दूध से सूखी गौ को निस्वार्थ सेवा चाहिए। AV 12-4-14 Same as above वही विषय फिर

यथा शेवधिर्निहितो  ब्राह्मणानां  तथा वशा ।

तामेतदच्छायन्ति  यस्मिन्कस्मिंश्च जायते ।। अथर्व 12-4-14

Like the protection to be provided for hidden

treasures, such cows must be provided with due

protection .

( Modern science calls it Pre parturition & post

parturition- a 90 days regime two months or more

before calving and at least one week after calving

care under best hands)

जैसे किसी कोष की सुरक्षा की जाती है, उसी प्रकार विद्वान  कुशल

हाथों से बाखड़ी, कम/बिना  दूध की गर्भवती गौ की सुरक्षा होती है। AV 12-4-15Denial of this service is cruelty to Cows

यह गौ सेवा उप्लब्ध न होना  गौ पर अत्याचार है

तस्मेतदच्छायन्ति  यद् ब्राह्मणा अभि ।

यथैनानन्यस्मिञ्जिनीयादेवास्या निरोधनम् ।। अथर्व 12-4-15

It is the duty of selfless good persons (veterinarians)

To provide this service. Denial of this service is cruelty towards Cows.

गौ वंश की ऐसी सेवा समाज का दायित्व है। इस सेवा का प्रबंध 

होना  गौ पर अत्याचार है।

Importance of Veterinary Services गो विज्ञान  का महत्व AV 12-4-16 Increase of Cows and identification

गो वंश विस्तार और उसे चिह्नित  करना

चरेदेवा त्रैहायणादविज्ञातगदा सती ।

वशां च विद्यान्नारद ब्राह्मणास्तह्येर्ष्याः ।। अथर्व 12-4-16

Up to three years of age a heifer moves around with

its mother. Then it Caves and has to be given an

identity and  donated to a deserving good household.

तीन  वर्ष तक की उस्रिया माता के संग रहती है। बछ्ड़ा देने  पर उस

का नामकरण करके किसी उपयुक्त परिवार को दान  की जाती है AV 12-4-17 Nonobservance of such practice

 Is not in best interests of society

ऐसे गोदान न करना समाज कल्याण हित में नही होता

य एनामवशामाह देवानां निहितं निधिम् ।

उभौ तस्मै भवाशर्वौ परिक्रम्येषुमस्यतः ।। अथर्व 12-4-17

Those who realize the wealth in cow's udders and

milk, but do not share these cows with population, are

doing great disservice to welfare of the community.

जो गौ के दुग्ध का महत्व जानते हुए भी ऐसे गोदान नहीं करते वे

समाज के लिए कल्याण कारी नहीं सिद्ध होते AV 12-4-18 Same again वही विषय फिर

यो अस्या ऊधो न  वेदाथो अस्या स्तनानुत ।

उभयेनैवास्मै दुहे दातुं चेदशकद्वशाम् । । अथर्व 12-4-18

Even ignorant persons if they donate cows for

Spreading them, do a great community service.

अविद्वान  लोग भी जो गोदान  से गौ संवर्द्धन  करने  के लिए यथा

समय गौ सेवा के लिए गौ दान  करते हैं, वे समाज सेवा का बड़ा

काम करते हैं AV 12-4-19 Same again वही विषय फिर

दुर दभ्नैनमा शये याचितां च ना  दित्सति।

नास्मै कामाः समृध्यन्ते  यामदत्त्वा चिकीर्षति ।। अथर्व 12-4-19

Motivated by selfish considerations those who do not

Lend their cows at appropriate times for proper care

 by experts, make their cows suffer and are in the end

not able to derive the benefits they were trying to

 protect in the first place .

बाखड़ी गर्भ वती गौ की विशेष सेवा के लिए जो लोग अपनी  गौओं

को विशेषज्ञों के पास दान रूप से नही भेजते, उन  की गौएं कष्ट में

रहती हैं और जो लाभ अपेक्षित था वह नहीं मिलता। AV 12-4-20  

Provide Vet experts honorable place

गो चिकित्सकों का आदर करो  

देवा वशामयाचन्मुखं कृत्वा ब्राह्मणम् ।

तेषां सर्वेषामददद्धेडं न्येति मानुषः ।। अथर्व 12-4-20

Veterarian’s offer  for providing help to community to

take care of Cows should be gratefully accepted .

Ignoring the Vet Services angers the Vet Experts

पशु चिकित्सक गो सेवा के लिए उत्सुक रहते हैं। उन  सेवा ने  लेने

पर वे  क्रुद्ध होते हैं। AV 12-4-21 Veterinarians पशु चिकित्सक

हेडं पशूनां न्येति ब्राह्मणेभ्योऽददद्वशाम् ।

देवानां निहितं भागं मर्त्यश्चेन्निप्रियायते ।। अथर्व 12-4-21

Veterinarians are to be made available to serve cows.

By not taking  their services properly even the cows

are put to great  discomfort.

गौ सेवा के लिए प्रशिक्षित जन गोसेवा अवसर की प्रतीक्षा में  उत्सुक

रहते हैं। उन  की सेवा न  लेने  से गौ को भी बहुत पीड़ा होती है। AV 12-4-22 Veterinary help

पशु चिकित्सा दायित्व

यदन्ये  शतं याचेयुर्ब्राह्मणा गोपतिं वशाम्‌।

अथैनां  देवा अब्रुवन्नेवं ह विदुषो वशा ।। अथर्व 12-4-22

Hundreds of people seek help from veterinarians, and

All their cows are said to belong to him.

बहुत से लोग अपनी  गौएं पशु चिकित्सक के पास ले जाते हैं। वे सब

गौ उस चिकित्सक की कही जाती हैं। AV12-4-23 Expert Vet Services

कुशल पशु चिकित्सक सेवा

य एवं विदुषेऽदत्त्वाथान्येभ्यो ददद्वशाम् ।

दुर्गा तस्मा अधिष्ठाने पृथिवी सहदेवता ।। अथर्व 12-4-23

Those who do not take help of trained Vets and go to

Seek help from illiterates, cause lot of misery and loss

to society.

जो लोग विद्वान  पशुचिकित्सकों को छोड़ कर अविद्वानों  के पास

जाते हैं, वे समाज में दुःख का कारण होते हैं। AV 12.4.24 Ignoring Vet help

पशु चिकित्सा न लेना

देवा वशामयाचन्यस्मिन्नग्रे अजायत ।

तामेतां विद्यान्नारदः सह देवै रुदाजत ।। अथर्व 12-4-24

First time pregnant cow needs extra care. House

Holders may think of such cows to be their blessing

and feel that it can take care of itself on its own as a


पहली बार गर्भ वती को गृह स्वामी अपना  सौभाग्य समझ कर यह

सोच लेता है कि सब अपने  से ठीक होगा। यह ग़लती है AV 12-4-25 Continued वही विषय

अनपत्यमल्पपशुं वशा कृणोति पूरुषम्‌।

ब्राह्मणैश्च याचितामथैनां निप्रियायते ।। अथर्व 12-4-25

Ignoring the expert Vet help those who confine such cows to their family out of misplaced affection, unknowingly cause harm to their cows and bring damage to the interests of their family.

विशेषज्ञों की सहायता न  ले कर ये गो स्वामी गौ और अपने  परिवार का और गौ का अहित करता है। AV 12-4-26

अग्नीषोमाभ्यां कामाय मित्राय वरुणाय च ।

तेभ्यो याचन्ति  ब्राह्मणास्तेष्वा वृश्चतेऽददत् ।। अथर्व 12-4-26

Knowledge, Skills, Expert help, Implements and Resources all are needed for proper care. Ignoring this is a retrograde step.

विद्वत्ता, ज्ञान , हर प्रकार के संसाधन  उपयुक्त  स्थान  और समय पर उपलब्ध रहने  चाहिएं।

इन  सब पर ध्यान न  देना  समाज में पिछड़ापन  बढ़ाता है।

PASTURE FEEDING गोचर विषय AV 12.4.27 Time to release Cows for Pastures प्रातः काल गोचर

यावदस्या गोपतिर्नोपशृणुयाद्दचः स्वयम् ।

चरेदस्य तावद्गोषु नास्यं श्रुत्वा गृहे वसेत् ।। अथर्व 12-4-27

Morning strains of mantras when heard being recited at Agnihotras indicates the time to release cows to go to pastures for self feeding.

प्रातः कालीन मंत्रो के पाठ की ध्वनि  जब सुनाई देती है, तब जानिए कि गौओं को गोचर में जाने  का समय हो चला AV 12-4-28 Stall feeding is harmful घर में गौ को बंध कर मत रखो

यो अस्या ऋचउपश्रुत्याथ गोष्वचीचरत् ।

आयुश्च तस्य भूतिं च देवा वृश्चन्ति  हीडिताः ।। अथर्व 12-4-28

One who keeps Cows at home to feed even after hearing the morning mantra patha suffers in life.

जो प्रातःकाल मंत्र ध्वनि  सुनने  के पश्चात भी गौ को अपने  घर पर बांध कर खिलाता है, वह जीवन  मे दुख पाता है। AV 12.4.29 Time to stay in Pastures गोचर में रहने  का समय

वशां चरन्ति  बहुधा देवानां निहितो निधिः ।

आविष्कृणुष्व रूपाणि यदा स्थाम जिघांसति ।। अथर्व 12- 4-29

As long as the cows like to feed in pastures they represent community assets. When cows want to retreat from pastures they indicate it by many signs.

गोचर में गौएं समाज की धरोहर के रूप में रहती हैं।जब वे पुन: अपने  गृह स्वामी के स्थान  जाना  चाहती हैं, स्वयम् संकेत करती हैं। AV 12-4-30

आविरात्मानं कृणुते यदास्त्थाम जिघांसति।

अथो ह ब्रह्मभ्यो वशा याञ्च्याय कृणुते मन:।। अथर्व 12-4-30

Cow herself indicates the time for her to go back to her home for help from her master

जब गोचर से गृह स्वामी के पास जाने  का समय होता है गौ स्वयम् ऐसे संकेत देती है। AV 12-4-31Cow's desires are to be complied , गौ के अनुकूल आचरण हो

मनसा सं कल्पयति तद्देवाँ अपि गच्छति ।

ततो ह ब्रह्माभ्यो  वशामुपप्रयन्ति  याचितुम् ।। अथर्व 12-4-31

When Cows want to leave pastures to return to their homes, their desires should be complied with. ( It is the udder stress when it is full of milk, that prompts cow to return to her master for milking her and feeding her calf)

गौ के घर लौटने  के संकेत पर दूध दुहने  के लिए गौ को गृह स्वामी के यहां ले जाना चाहिए। AV 12-4-32 Cow's Blessings गौ के आशीर्वाद

स्वधाकारेण पितृभ्यो यज्ञेन  देवताभ्यः ।

दानेन  राजन्यो  वशाया मातुर्हेडं न गच्छति ।। अथर्व 12-4-32

Cows blessings flow by long life  and  presence of  elders in Society, Ajya for havi in yagyas, for the Society by her bounties (organic agriculture).

पितरों को अपने  स्वरूप से, ब्राह्मणों को यज्ञ में आज्य की हवि से,राज्य को अपनी  उपलब्धियों से धन्य  करती हैं। AV 12-4-33 Cows belong to the learned गौ बुद्धिजीवियों की होती है

वशा माता राजन्यस्य तथा संभूतमग्रशः ।

तस्या आहुरनर्पणं यद ब्रह्मभ्यः प्रदीयते ।। अथर्व 12-4-33

Cow on first priority provides for protecting the welfare of society like a

mother does. But Cow really belongs to the Veterinarian intellectuals, who

provide for its  upkeep.

गौ सामाज को सर्व प्रथम माता कि तरह संरक्षण प्रदान  करती है।

परन्तु वास्तव में विद्वान  बुद्धिजीवि ही गौ को सुरक्षा प्रदान  करते

हैं। AV12-4-34 Gross treatment of Cows a Crime गाव से दुर्व्यवहार अपराध है

यथाज्यं प्रगृहीतमालुम्पेत्स्त्रुचो अग्नये ।

एवा ह ब्रह्मभ्यो वशग्नय आ वृश्चतेऽददत् ।। अथर्व 12-4-34

Like Ajya havi dropping outside the fire is a crime, not providing the cows

with good Veterinary care is also a crime.

जैसे यज्ञाग्नि  से बाहर स्रुवा से आज्य गिराना  अपराध है, उसी प्रकार गौ को पशु चिकित्सक की

सेवा से दूर रखना  भी एक अपराध है। AV 12-4-35 Productive cow fulfils all needs दुधारु गौ सम्पन्नता प्रदान करती है

पुरोडाशवत्सा सुदुधा लोकेऽस्मा उप तिष्ठति

सस्मै सर्वान्कामान्वशा  प्रददुशषे  दुह ।। अथर्व 12-4-35

Productive Cows fulfill all needs of the society

सवत्सा दुधारु गौ सब कामानाएं पूर्ण करती है AV 12-4-36 Denying provision of cows leads to hell गो सेवा न  करना नरक देता है

सर्वान्कामान्ययमराज्ये वशा प्रददुशे दुहे 

अथहुर्नारकं लोकं निरुन्धा नस्य याचिताम् ।। अथर्व 12-4-36

Not making provision for good cows, denying cow products to the needy,

turns the society in to a living hell

गो सेवा से यम राज के यहां भी सब इच्छा पूरी होती हैं, परन्तु  गौ की  सेवा न  करने  से नरक

से छुटकारा नहीं मिलता। AV 12-4-37 Cows denied mating are angry cows

गौ को वृषभ आवश्यक है

प्रवीयमाना  चरति क्रुद्धा गोपतये वशा ।

वेहतं मा मन्यमानो  मृत्योः पाशेषु बध्यताम् ।। अथर्व 12-4-37

Denial of breeding to good cows makes them infertile makes cows angry

and curse the keepers to Death.

(Modern practice of artificial insemination is known to  cause infertility. This

 is a challenge for modern Dairy Practice.))   

गौ को वृषभ का सहवास न  मिलने  पर गौ क्रोधित और बांझ होने

 लगती  हैं (क्रित्रिम गर्भाधान में गौ बांझ होने लगती हैं ) AV 12-4-38 Cow Breeding facility

गौ प्रजनन व्यवस्था

यो वेहतं मन्यमानो ऽमा च पचते वशा ।

अप्यस्य पुत्रान्‌ पौत्रांश्च याचयते बृहस्पति ।। 12-4-38

Neglect of breeding a good cow makes the coming  generation of society in

 to beggars

जिस समाज में गौ प्रजनन सुव्यवस्थित नहीं होता वहां के लोग भीख मांगते हैं।

Pasture Significance गोचर महत्व AV 12-4-39 Pastures should have free access गोचर महत्व

महदेषाव तपति चरन्ति  गोषु गौरपि ।

अथो ह गोपतये वशाददुषे विषं दुहे ।। अथर्व 12-4-39

Barriers in pastures angers the cows, the milk from such cows is likened to

poison. (महदेषाव - Big barriers)

(This fact is fully supported by latest dairy

science researches. Only milk of green forage fed cows is rich Essential

Fatty acids-Omega3 & Omega 6 and has much lower saturated fat content

and is rich with all Carotenoids. This is confirmed by the researches

shown here.)


गोचर में जाने में गौओं को कोई बाधा नही होनी  चाहिए। जो गौ गोचर नहीं जा पाती उन का

दूध विष समान  होता है। गोचर में पोषित गौ के दूध में वे पोषक तत्व होते हैं जिन्हे आधुनिक

वैज्ञानिक करोटिनायड जो नेत्र ज्योति का संरक्षण करते हैं यह तत्व भैंस के दूध में नहीं पाए

जाते.  और असंतृप्त वसा unsaturated Fatty  Acids  कहलाते हैं, जो मानव शरीर के लिए

सर्व रोग निरोधक और ओषधि माने जाते हैं.  इन्हीं के कारण गोदुग्ध को अमृत कहा जाता है. 


गो दुग्ध में वसा AV 12-4-40 High fat milk for Brahmins

ब्राह्मणों को आज्य के लिए अधिक वसा

प्रियं पशूनाम भवति यद् ब्रह्म्भ्यः प्रदीयते ।

अथो वशायास्तत्प्रियं  यद्देवत्रा हविः स्यात् ।। अथर्व 12-4-40

For Brahmins to perform Yagyas higher fat content in milk is provided. This

 in turn brings great benefits to Environment, Society and even other cows

 and agriculture.

ब्राह्मणों द्वारा बड़े बड़े यज्ञ करने  के लिए गोघृत के लिए अधिक वसा वाले गोदुग्ध का प्रबन्ध

होता है। इन  यज्ञों से पर्यावरण के साथ कृषि, गौ  इत्यादि को भी लाभ होता है। AV 12-4-41 Higher fat Milk

या वशा उदकल्पयन्देवा यज्ञादुदेत्य।

तासां विलिप्त्यं भीमामुदाकुरुत नारदः ।। अथर्व 12-4-41

For yagyas experts developed very high fat content milk bearing cows such

as Vilpti breeds

यज्ञों के लिए अधिक वसा वाले दुग्ध की गौ विलिप्ती कहलाती है।

( During Vedic times, High Fat content of Cow's milk was not considered

desirable quality milk and had to

be consumed very carefully. To get the best desirable qualities in Milk,

cows were sent for green forage feeding in Pastures. Stall feeding and

heavy concentrated grain feeding which is very proudly acknowledged as a

veterinary nutrition science achievement has been the main cause of host

of new human diseases that were not known in earlier  times.) AV12-4-42 About Vilipti Breeds

विलिप्ती के बारे में

तां देवा अमीमास-त वशेया 3 मबशेतिं।

तामब्रवीन्नारद एषा वशानां  वशतमेति ।। अथर्व 12-4-42

It was feared that such cows may not be of good    temperament. But on

the contrary such cows were found to be very docile

शंका थी कि विलिप्ती सुशील स्वभाव की न  होगी। परन्तु  ऐसा नहीं है। AV 12-4-43 Vilipti population control

विलिप्ती का प्रसार

कति नु  वशा नारद यास्त्वं वेत्थ मनुष्यजाः ।

तास्वा पृच्छामि विद्वांसं कस्या नाश्नीयादब्राह्मणः ।। 12-4-43

Such cows were specially desired for Brahmans doing yagyas to meet the

extra requirements of fat for havi, it was therefore to be ensured that

adequate numbers of such cows are born, and are to be exclusively

meant for Brahmins to perform yagyas. (This is confirmed by Kerala

Namboodri Brahmins maintaining Vitur breeds of cows that give milk with

higher fat content.)

आवश्यकता के अनुसार आज्य की व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में

विलिप्ति गौ की प्रजनन प्रबंध  योजना  आवश्यक है। AV 12-4-44 High Fat milk is not for human diet अधिक वसा का दुग्ध आहार नहीं

विलिप्त्या बृहस्पते या च सूतवशा वशा ।

तस्या नाश्नीयादब्राह्मणो या आशंसेत भूत्याम् ।। अथर्व 12-4-44

Experts pointed out that if one is looking for assured Good life, High Fat

milk from these domesticated cows was to be used intelligently ( by

removing extra fat) human diet. This high fat in milk  was  designed for

yagyas by Brahmins. AV 12-4-45 Experts should guide about

Which  cows are meant for what purpose

विशेषज्ञ बताएं किस गौ का दुग्ध आहार  के योग्य है

नमस्ते अस्तु नारदानुष्ठु विदुषे वशा ।

कतमासां भीमतमा यमदत्त्वा पराभवेत ।। अथर्व 12-4-45

Gratitude is expressed for the guidance of experts to advise about

suitability of milk for specific uses.

विद्वानों  का आभार है जो यह ज्ञान  देते हैं कि किस गौ का दुग्ध किस प्रयोग में लेना  है। AV 12-4-46 Only docile cows to be kept as family cows

विलिप्ती या बृहस्पते ऽथो सूतवशा वशा ।

तस्या नाश्नीयादब्राह्मणो य आशंसेत भूत्याम् । ।अथर्व 12-4-46

Cows called Vilipti which give high fat milk, and those called Sootwasha,

that  can be controlled only by expert  staff, are not to be used as

domesticated family cows.

विलिप्ती अधिक वसा वाला दुग्ध देने  वालि गौ और सूतवशा मरखनी गौ जो केवल कर्मचारियों

के वश में रह सकती हैं , ग़ृह परिवार में पालने के योग्य नहीं होती। AV 12-4-47 Three categories of cows गौ कि तीन  प्रजातियां

त्रीणि वै वशाजातानि विलिप्ती सूतवशा वशा ।

तः प्रच्छेद् ब्रह्मभ्यः सो ऽनाव्रस्कः प्रजापतौ । । अथर्व 12-4-47

These three categories of cows, require to be


1. Those whose milk has high fat content,

2.Those which are difficult to control,

3.Those which are docile by nature and good as

 household cows .

विलिप्ती, सूतवशा और वशा गौ की तीन  प्रजातियां हैं । AV 12-4-48 Donate high Fat Milk for Yagyas

अधिक वसा के दुग्ध का आज्य में प्रयोग

एतद् वो ब्राह्मणा हविरति मन्वीत याचितः ।

वशां चेदेनं  याचेयुर्या भीमाददुषो गृहे ।। अथर्व 12-4-48

Donate high fat milk cows to Brahmins to facilitate performing of Ygyas.

Such cows are very dangerous (for health) to keep in one's family, and

should be donated for making Ajya for Havi .

अधिक वसा वाली गौ को यज्ञ के आज्य के लिए ब्राह्मणों को दान  मे दे देना  उचित है। ऐसी गौ को परिवार में दुग्धाहार के लिए न ही रखना चाहिए। AV 12.4.49

देवां वशां पर्यवद न्‌ न नोऽदादिति हीडिताः।

एताभिरृषिग्भिर्भेदं तस्माद् वै स पराभवत्‌।। अथर्व 12-4-49

Those who ignore the advice to seek help of Vet experts in matters connected with family cows, seriously suffer the ill effects on their cows.

जो जन गौ ज्ञान विशेषज्ञों से सहायता नहीं लेते उन के गोवंश की अवनति होती है. AV 12-4-50

उतैनां भेदो नाददाद् वशामिन्द्रण याचितः ।

तस्मात् तं देवा आगसोऽवृश्चन्नहमुत्तरे ।। अथर्व 12-4-50

Those who did not seek Vet help for their cows even after having been advised to get expert learned person's help, met with death in life as a punishment for ignoring the sage advice.

(Here the reference is to not making available pre-parturition and post-parturition help for their household cows. Cows under such neglect not only suffer physically ill health, drop the new born, but also are liable to spread contagious diseases to humans. In the long run such cows the health and milk production of such cows gradually declines, as has happened in India.)

इस आदेश का पालन न  करने  वालों को मृत्यु प्राप्त हुइ । AV 12-4-51

ये वशाया अदानाय वदन्ति  परिरापिणः । इन्द्रस्य मन्यवे जाल्मा आ वृश्चन्ते  अचित्या ।। अथर्व 12-4-51

वे लोग जो गोसेवा मे समय नहीं देते, जैविक कृषि, पञ्चगव्य इत्यादि का लाभ नहीं लेते, वे रुद्र के कोप से ग्रसित होते हैं।

Those ill advised who do not devote their time and labor for utilizing

 the family cows , and cultivate organic crops they suffer through

pests insects, diseases thrown by Rudra. (Rudra here is the controller

of harmful diseases caused by microbial agents). AV12-4-52

ये गोपतिं पराणीयाथाहुर्मा ददा इति ।

रुद्रस्यास्तां ते हेतिं परि यन्तचित्त्या ।। अथर्व 12-4-52

Those cow owners who get misled in to not giving their cows in to the

care of experts, do not realize that they suffer innumerable ruinous

diseases caused by microbiological pathogens. (This is a clear

reference to communicable zoonotic diseases like brucellosis,

tuberculosis etc being transferred to humans from sick  cows)

जो अज्ञानी  समाज गौ की कुशल विद्वानों  से देख रेख नहीं करवाता वह स्वयं भी भयंकर  रोगों से ग्रसित हो जाता है AV 12-4-53

यदि हुता यद्यहुताममा च पचते वशाम् ।

देवान्त्सब्राह्मणा नृत्वा जिह्नो  लोकान्निर्रिच्छंति ।।12-4-53

Such a person and society that keeps its cows in confinement in their homes, suffer fall from grace of learned people and Gods.

जो यज्ञादि के कारण गौ को निज गृह में बांध कर ही रखता है, वह समाज और देवों के प्रति पाप कर और समाज को हीन  बनाता है। AV 3.14.1        

संवो गोष्ठेन सुषदा सं रय्यसं सुभूत्या।  अहर्जातस्य यन्नाम तेना व: सं सृजा मसि।।

अथर्व 3.14.1

In this cow house', we provide for you with, Comfortable bedding obtained with money, good materials of Freshly daily produced feeds & water, and provide for many calvings.

(सुषदा गोष्ठेन व: सम्‌) सुख से जहां बैठा जा सकता है, ऐसे गोष्ठ का प्रबंध करो.

(रय्या  सं ,भूत्या सं) उत्तम साधनों और आहार का प्रबंध करो. ( जल और हरा) स्वच्छ जल से और उत्तम हरे से दुग्ध उत्पादन  और गौ के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार होता है. 

( अहर्जातस्य तेना सृजामसि) पुन: पुन: गर्भ धारण कर के बछड़े बछिया को जन्म देने की व्यवस्था करो ( उत्तम नन्दी  उपलब्ध करो)

( In earlier times cows were provided with comfortable floors of clean earth, sand , or straw etc to sit. In modern Dairy practice Cows are provided with comfortable beddings to sit. Plastic Foam pads, and composite canvass water beds are in use in developed world. By providing hard floors for cows to sit, discomfort, damage to milk teats and udder and injuries to knees etc are very common. Milk yield increase up to 10% is possible just by providing comfortable beddings for cows. Good water to drink and green fodder makes significant improvements in health and milk productivity of Cows.)

Duty of State AV 3-14-2

सं व: सृजत्वर्यमा सं पूषा सं बॄहस्पति:।

समिन्द्रो यो धनंजयो मयि पुष्यत यद् वसु।।

सब प्रकार के साधनों के कुशल प्रबंध  से गौ समाज में सम्पन्नता और पौष्टिकता प्रदानकरती है।

अर्यमा Chief Justice, पूषा  Food Minister बृहस्पति  Education minister धनंजय: Finance incharge  इंद्रो Good hard workers   व: मयि for you (the cow) & me सं सृजत् Provide for us, ie Cows and community  to be पुष्यत to be well fed यद वसु with prosperous living.

न्याय , खाद्यान्न , शिक्षा , आर्थिक व्यवस्थाएं  ऐसा प्रबंध करें  कि  कुशल युवा द्वारा गौ द्वारा समृद्धि और सम्पन्नता प्राप्त हो .

AV 3-14-3

संजग्माना अबिम्युषीर स्मिन् गोष्ठे करीषिणी:।

विभ्रती: सोम्यं मध्यनमीवा  उपेतन।। अथर्व 3-14-3

संजग्माना Moving together (in large scale operations like biogas, Panchgavya productions) अबिभ्युषी protected from thieves & carnivore करीषणी: provide with farm yard manure अस्मिन गोष्ठे उपेतन stay with us in our Goshala & your place providing सोम्यम मधु  sweet milk full of सोम Which gives to mind virtuous motivation - अनमीवा physically free from all diseases विभ्रती  spread & distribute in all directions.

इस गोशाला में अनेक  गौवें सुरक्षित, स्वस्थ, सुख से रहती हुई, (जिस से बड़े  स्तर पर उत्पादन द्वारा ) हमें उत्तम गोबर गोमूत्र के जैविक अन्न  पदार्थ और उत्तम दुग्धादि, पञ्च गव्य  द्वारा शारीरिक पौष्टिकता और  मानसिक विकास प्रदान करें।  General management  

AV 3-14-4

इहैव गाव एतनेहो शकेव पुष्यत | इहैवोत प्र जायध्वं मयि संज्ञानमस्तु || अथर्व 3.14.4

Welcome all cows with love and affection to live in this institution, to grow in health, and numbers with excellent progeny .

सब गौवों को श्रद्धा और सेवा भाव से प्रेरित सुख मय वतावरण प्रदान करो, जिस से गोवंश की उन्नति हो  AV 3-14-5 Goshala to have Biodiversity of life

गोशाला में भिन्न भिन्न जीव जंतु  आवश्यक 

शिवो वो गोष्ठो भवतु शारिशाकेव पुष्यत।

इहैवोत प्र जायध्वं मया व: संसृजामसि।। अथर्व 3-14-5

सं सृजामसि We provide for you  शिवो वो गिष्ठो  this shelter to be blessed with, शारिकाशैव different birds (like egrets) Parrots and animals  living together in this cow house may provide us with रायस्पोषेण बहुला  Plentiful bounties सदेम  Sustainable रुप Welfare जीवा जीवन्ती for all the life here. to be also पुष्यत healthy on feeds,  प्रजायध्वं and to have large progeny. (biodiversity chain of nature)

इस गौशाला में गौओं के संपूर्ण विकास के पर्यावरण  में भिन्न भिन्न प्रकार के तोते बगुले  इत्यादि पक्षी अन्य पशु  साथ साथ रहने वाले भी गौ के स्वास्थ्य और पौष्टिकता के लिए आवश्यक हैं. AV 3-14-6

मया गावों गोपतिना सचध्वमयं नो गोष्ठ इह पोषयिष्णु: ।

रायस्पोषेण बहुला भवन्तीर्जीवा जीवन्तीरुप व: सदेम।। अथर्व 3-14-6

Thus live with large number of happy well-fed well-loved cows for growth, health, long life and prosperity.

मया गोपतिना सचध्वम- मुझ गोपति के साथ रहकर आनंद भोग करती और कराती गौएं , इह पोयिष्णु – सदा पुप्ष्ट रहें और पौष्टिकता प्रदान करें, रायस्पोषेण बहुला – धन धान्य से सम्पन्नता  का साधन बनें , जीवन्ती: -सुख से जीवित रहती हुई , व: जिवा: उपसदेम- अपने (गौवों के साथ रह्ने से हम भी दीर्घायु बनें.